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हर-हर महादेव: आज से पवित्र सावन मास की शुरुआत, शिव भक्ति में डूबेंगे श्रद्धालु; जानिए पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं

चन्द्रकिशोर जायसवाल 

नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026

भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले पवित्र श्रावण यानी सावन मास की आज, गुरुवार 30 जुलाई 2026 से शुरुआत हो गई है। सावन शुरू होते ही शिवालयों में पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का दौर तेज हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।



उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार सावन मास 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त 2026 को होगा।

सावन में कैसे करें भगवान शिव की पूजा?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान शिव का ध्यान करते हैं। शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार बेलपत्र, पुष्प आदि भी चढ़ाए जाते हैं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।

सावन के सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।

सावन की पूजा के क्या माने जाते हैं लाभ?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। भक्त सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली, मनोकामना पूर्ति और जीवन में शांति की कामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। सावन सोमवार का व्रत भी विशेष फलदायी माना जाता है।

हालांकि पूजा से जुड़े इन लाभों को धार्मिक आस्था और मान्यता के रूप में ही समझा जाना चाहिए, न कि वैज्ञानिक या चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित लाभ के रूप में।

सावन में इन बातों पर दें विशेष ध्यान

पूजा-पाठ के साथ श्रद्धालुओं को स्वच्छता और सात्विक आचरण पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है। शिवलिंग पर सामग्री चढ़ाते समय स्थानीय मंदिर की परंपराओं और नियमों का पालन करना उचित है। व्रत रखने वाले बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोग अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही उपवास करें।

सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे भक्ति, संयम, सेवा और आत्मचिंतन का भी समय माना जाता है।


आज से गूंजेगा—हर हर महादेव!

बोल बम… बोल बम…

ॐ नमः शिवाय।


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