चन्द्रकिशोर जायसवाल
कुशीनगर के कप्तानगंज स्थित सच्चिदानंद हॉस्पिटल में चार दिन की नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए घंटों धरना दिया और अस्पताल को सील करने तथा जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामला रामकोला थाना क्षेत्र के अमडरिया परसौनी गांव निवासी अश्वनी मिश्रा के परिवार से जुड़ा है। उनकी पत्नी मीनाक्षी मिश्रा को प्रसव पीड़ा होने पर 19 अगस्त को सच्चिदानंद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 20 अगस्त को बच्ची का जन्म हुआ। अस्पताल की ओर से बच्ची को समय से पहले जन्मी और बेहद कमजोर बताया गया। इलाज के दौरान सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
बच्ची की मौत के बाद परिजनों का आरोप था कि उसकी हालत गंभीर होने के बावजूद उसे समय रहते उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर नहीं किया गया। उन्होंने अस्पताल सील करने और जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
शव लेकर पैदल जिलाधिकारी कार्यालय की ओर निकले परिजन
काफी देर तक मांग पूरी नहीं होने के बाद पोस्टमार्टम के पश्चात परिजन सोमवार शाम करीब 6 बजे नवजात का शव लेकर पैदल जिला मुख्यालय रविंद्रनगर धूस की ओर निकल पड़े।
रास्ते में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें रोककर समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन अपनी मांग पर कायम रहे। रात करीब 10 बजे पडरौना के सुभाष चौक के आसपास प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। करीब एक घंटे की बातचीत के बाद प्रशासन ने 72 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेटी जांच कराने और जांच में लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
अस्पताल का पक्ष भी सामने आया
अस्पताल की डॉक्टर मोली पाल ने परिजनों के लापरवाही के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि बच्ची का जन्म सात महीने में हुआ था और वह काफी कमजोर थी। अस्पताल के अनुसार बच्ची को आवश्यक उपचार दिया गया, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।

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