संवाददाता भारतेंदु मणि त्रिपाठी
बैतालपुर रेलवे ढाला क्षेत्र में अंडरपास न होने से आसपास के लगभग 50 से 60 गांवों के लोगों को रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे फाटक बंद होते ही दोनों ओर वाहनों और राहगीरों की लंबी कतार लग जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों का समय बर्बाद होता है, जबकि बारिश के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से रेलवे ढाला पर अंडरपास निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी। लोगों का आरोप है कि बारिश के समय सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती है, जिससे एंबुलेंस तक को समय पर निकलने में परेशानी होती है। कई बार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी हो जाती है।
रेलवे फाटक बंद होते ही थम जाती है ज़िंदगी, बारिश में बढ़ जाती है परेशानी; स्थानीय लोग वर्षों से कर रहे हैं अंडरपास की मांग
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि यहां अंडरपास का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों को रोज़ाना जाम और दुर्घटना के खतरे से राहत मिलेगी। साथ ही किसानों की उपज, व्यापारिक गतिविधियां और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित नहीं होगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से लोगों ने मांग की है कि बैतालपुर रेलवे ढाला पर शीघ्र अंडरपास निर्माण की स्वीकृति देकर कार्य शुरू कराया जाए, ताकि क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

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