Gold-Silver Price Crash LIVE: ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य संकट के चलते शेयर बाजार के साथ-साथ सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर 600 रुपये और सिल्वर फ्यूचर 982 रुपये नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आगे गिरावट की आशंका है।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट को लेकर अस्थिरता बनी हुई है जिसके कारण शेयर बाजार के साथ-साथ सोने और चांदी में भी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर 600 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,152 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, सिल्वर फ्यूचर 982 रुपये टूटकर 2,40,503 पर कारोबार कर रहा है। सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतें गिरावट के साथ खुली हैं। 24 कैरेट वाले शुद्ध सोने का भाव 150664 रुपये प्रति दस ग्राम है, जबकि चांदी 240890 रुपये प्रति किलोग्राम है।
सोने-चांदी में गिरावट की मुख्य वजह मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दर और मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर बनी अनिश्चितता है, क्योंकि बाजार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की संभावनाओं को लेकर सतर्क रहे। दरअसल, ईरान ने होर्मुज से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की मांग की, जबकि वाशिंगटन ने इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह से खोलने पर जोर दिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा।
इस बीच, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जिससे जलडमरूमध्य से आपूर्ति में जारी बाधाओं का संकेत मिला और ऊर्जा-प्रेरित मुद्रास्फीति के झटके की आशंकाएं फिर से बढ़ गईं।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट को लेकर अस्थिरता बनी हुई है जिसके कारण शेयर बाजार के साथ-साथ सोने और चांदी में भी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर 600 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,152 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, सिल्वर फ्यूचर 982 रुपये टूटकर 2,40,503 पर कारोबार कर रहा है। सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतें गिरावट के साथ खुली हैं। 24 कैरेट वाले शुद्ध सोने का भाव 150664 रुपये प्रति दस ग्राम है, जबकि चांदी 240890 रुपये प्रति किलोग्राम है।
सोने-चांदी में गिरावट की मुख्य वजह मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दर और मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर बनी अनिश्चितता है, क्योंकि बाजार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की संभावनाओं को लेकर सतर्क रहे। दरअसल, ईरान ने होर्मुज से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की मांग की, जबकि वाशिंगटन ने इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह से खोलने पर जोर दिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा।
इस बीच, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जिससे जलडमरूमध्य से आपूर्ति में जारी बाधाओं का संकेत मिला और ऊर्जा-प्रेरित मुद्रास्फीति के झटके की आशंकाएं फिर से बढ़ गईं।
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